
हौसले की उड़ान: 6 दिन, 872 किलोमीटर और विठ्ठल भक्ति का अनोखा कीर्तिमान
गोंदिया: कहते हैं कि अगर मन में अटूट विश्वास और इरादों में फौलाद जैसी मजबूती हो, तो कोई भी मंजिल नामुमकिन नहीं होती। ऐसा ही एक ऐतिहासिक और गर्व से भर देने वाला कारनामा कर दिखाया है गोंदिया के 5 साइकिल वीरों ने। आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर ‘गोंदिया साइकिलिंग संडे ग्रुप’ के इन जांबाजों ने महज 6 दिनों के भीतर 872 किलोमीटर का बेहद कठिन सफर साइकिल से तय कर पंढरपूर में भगवान विठ्ठल-रुक्मिणी के दर्शन किए।
कारगिल योद्धा उदयभान निर्वाण ने पेश की मिसाल, कृत्रिम पैर से तय किया सफर
इस पूरी साइकिल वारी के सबसे बड़े आकर्षण और देश के लिए प्रेरणास्रोत रहे पूर्व सैनिक उदयभान निर्वाण। कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए अपना एक पैर गंवाने वाले इस वीर योद्धा ने साबित कर दिया कि शारीरिक अक्षमता कभी हौसलों के आगे दीवार नहीं बन सकती। उदयभान निर्वाण ने अपने कृत्रिम पैर (Artificial Leg) के सहारे दिन-रात साइकिल चलाकर इस 872 किमी की दूरी को बौना साबित कर दिया। उनके इस जज्बे को जिसने भी देखा, वह नतमस्तक हो गया।
इस जांबाज दल में गोंदिया के नगर पालिका अध्यक्ष सचिन शेंडे भी शामिल रहे, जिन्होंने टीम का नेतृत्व करते हुए इस सफर को पूरा किया।
चिलचिलाती धूप, पहाड़ी रास्ते… पर नहीं डगमगाए कदम
गोंदिया से पंढरपूर तक का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। रास्ते में चिलचिलाती धूप, थका देने वाली चढ़ाई और उबड़-खाबड़ रास्तों जैसी कई चुनौतियां आईं, लेकिन विठ्ठल भक्ति और कुछ कर गुजरने के जुनून के आगे इन वीरों ने हार नहीं मानी। 6 दिनों तक लगातार पैडल मारकर आखिरकार इस दल ने पंढरपूर में माथा टेका।
“जब मन में देश के प्रति जज्बा और विठ्ठल की भक्ति हो, तो पैर का न होना भी मायने नहीं रखता। यह यात्रा समाज को यह संदेश देने के लिए थी कि हौसला कभी दिव्यांग नहीं होता।” — उदयभान निर्वाण, कारगिल योद्धा
गोंदिया लौटने पर ढोल-ताशों से हुआ भव्य स्वागत
पंढरपूर से विठ्ठल दर्शन कर जब यह वीर दल वापस गोंदिया पहुंचा, तो पूरे शहर ने पलक-पावड़े बिछाकर उनका स्वागत किया। शहर के नागरिकों ने इन जांबाजों पर फूलों की बारिश की। ढोल-ताशों की थाप और देशभक्ति के नारों के बीच पूरा गोंदिया शहर इन साइकिल वीरों के स्वागत में झूम उठा।
ब्यूरो रिपोर्ट, न्यूज़ भारत।
