
नागपुर:
देश में महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर एक बार फिर मांग तेज होने लगी है। उपराजधानी नागपुर में ‘महिला संघटना संयुक्त कृती समिती’ के बैनर तले विभिन्न महिला संगठनों ने एक विशाल संयुक्त आंदोलन कर सरकार के खिलाफ हुंकार भरी है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि महिलाओं को उनका अधिकार तुरंत मिलना चाहिए और इसमें किसी भी तरह की कानूनी या तकनीकी देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रमुख मांगें: परिसीमन (Delimitation) और जनगणना की शर्त हटाने पर अड़ीं महिलाएं
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी महिलाओं ने एक सुर में अपनी मांगों को बुलंद किया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों और प्रदर्शन स्थल पर लगे पोस्टरों के अनुसार, महिला संगठन की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- बिना परिसीमन तुरंत हो लागू: नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) को बिना किसी निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्गठन (Delimitation) और बिना जनगणना की शर्त के आगामी 2029 के लोकसभा व विधानसभा चुनावों से तुरंत लागू किया जाए।
- ओबीसी (OBC) महिलाओं को मिले हिस्सेदारी: ओबीसी वर्ग सहित अन्य सभी वंचित संवर्गों की महिलाओं को उनकी जनसंख्या के आधार पर इस आरक्षण के भीतर आरक्षण (Sub-quota) दिया जाए।
- ‘नको नारी वंदन, हवा आमचा अधिकार’: आंदोलन में शामिल महिलाओं ने कड़े शब्दों में कहा कि उन्हें सिर्फ कागजी ‘वंदन’ या औपचारिकता नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार चाहिए।
इन प्रमुख महिला संगठनों का मिला समर्थन
नागपुर जिले में हुए इस बड़े आंदोलन में समाज के विभिन्न वर्गों और विचारधाराओं से जुड़े कुल 13 से अधिक सक्रिय संगठनों ने हिस्सा लिया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- संवैधानिक महिला संघ
- स्त्री हक्क जागर
- जिजाऊ ब्रिगेड
- संवैधानिक ओबीसी महिला महासंघ
- जनवादी महिला संघटना
- सावित्री ब्रिगेड
- कविवर्य अली संघटना
- संबद्ध महिला संघटना
- १९४२ महिला क्रांति परिषद
- भारतीय बौद्ध महासभा
- ओबीसी वकील महासंघ
- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति विकास परिषद महाराष्ट्र (महिला)
- महिला सद्भावना मंच नागपुर दक्षिण
