नागपुर सेंट्रल जेल हत्याकांड: कुश कटारिया हत्याकांड के आरोपी आयुष पुगलिया की हत्या में सूरज कोकणाके को उम्रकैद

नागपुर सेंट्रल जेल के भीतर हुए चर्चित और सनसनीखेज कैदी हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने बहुचर्चित कुश कटारिया हत्याकांड के आरोपी आयुष निर्मल पुगलिया की जेल में निर्मम हत्या करने वाले दोषी सूरज कोकणाके को आजीवन कारावास (उम्रकैद) और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश शेखर तोतला की अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत यह सजा तय की है।

कैसे दिया गया था वारदात को अंजाम?

अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, दोषी सूरज कोकणाके पहले से ही एक अन्य हत्या के मामले में नागपुर सेंट्रल जेल में सजा काट रहा था. जेल की बैरक नंबर-5 में बंद रहने के दौरान किसी बात को लेकर उसकी आयुष निर्मल पुगलिया से कहासुनी और विवाद हो गया.

विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी सूरज ने पहले शौचालय में फर्श पर पटक कर और पत्थर मारकर आयुष को गंभीर रूप से घायल कर दिया. इसके बाद बात यहीं नहीं रुकी, आरोपी ने रसोईघर में इस्तेमाल होने वाले बड़े चम्मच (कड़छी) के हैंडल को घिसकर धारदार बनाया और उससे आयुष के गले पर ताबड़तोड़ कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई.

21 गवाह और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने तय किया गुनाह

इस सनसनीखेज मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती सेि अपना पक्ष रखा। सरकारी अभियोक्ता (Public Prosecutor) श्याम खुळे की प्रभावी पैरवी के दम पर अदालत में पुख्ता सबूत पेश किए गए।

  • 21 गवाहों के बयान: अदालत में कुल 21 गवाहों से पूछताछ की गई।
  • वैज्ञानिक साक्ष्य और FSL रिपोर्ट: फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जब्ती पंचनामा ने इस हत्याकांड की गुत्थी को पूरी तरह से सुलझा दिया।

इन सभी ठोस वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी सूरज कोकणाके के खिलाफ अपराध संदेह से परे पूरी तरह साबित होता है।

क्या था पूरा बैकग्राउंड?

मृतक आयुष निर्मल पुगलिया खुद नागपुर के बेहद चर्चित और सनसनीखेज कुश कटारिया अपहरण एवं हत्या कांड का मुख्य आरोपी था, जिसमें उसे अदालत द्वारा सजा सुनाई गई थी. जेल के सलाखों के पीछे हुई इस खूनी झड़प ने उस समय पूरे महाराष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे.

अब जिला एवं सत्र न्यायालय के इस कड़े फैसले से यह साफ हो गया है कि कानून के हाथ लंबे हैं और जेल की चारदीवारी के भीतर किए गए जघन्य अपराधों के लिए भी अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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