
नागभीड (महाराष्ट्र): नगर परिषद नागभीड के कई वार्डों में अचानक डायरिया (हगवण) और उल्टी के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होने के कारण नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पीने के पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं और दूषित पानी की सप्लाई की आशंका जताई जा रही है।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भाजपा गुट नेता गणेश तर्वेकर और सभी भाजपा नगरसेवकों ने नगर परिषद नागभीड की मुख्याधिकारी (Chief Officer) सोनम देशमुख को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की तुरंत जांच कराई जाए और जरूरी कदम उठाए जाएं।
ज्ञापन में की गई मुख्य मांगें:
- पानी की लैब टेस्टिंग: शहर के प्रभावित इलाकों में सप्लाई होने वाले पीने के पानी की प्रयोगशाला (Lab) में तुरंत जांच कराई जाए।
- इंफ्रास्ट्रक्चर की सफाई: जल शुद्धीकरण केंद्र (Water Treatment Plant), पानी के स्टोरेज टैंक और पूरी पाइपलाइन का बारीकी से निरीक्षण कर उनका निर्जंतुकीकरण (Chlorination/Sanitization) किया जाए।
- स्वास्थ्य शिविर और स्वच्छता: जिन वार्डों में मरीज बढ़ रहे हैं, वहां स्वास्थ्य विभाग के तालमेल से विशेष मेडिकल कैंप लगाए जाएं, स्वच्छता अभियान चलाया जाए और लोगों को जागरूक किया जाए।
- नागरिकों के लिए एडवाइजरी: प्रशासन की ओर से नागरिकों को पानी उबालकर और छानकर पीने की सलाह दी जाए।
“नागरिकों का स्वास्थ्य हमारी पहली प्राथमिकता है। किसी भी तरह की हैजा (Cholera) जैसी महामारी की स्थिति बनने से पहले प्रशासन को अलर्ट मोड पर आना होगा। शुद्ध और सुरक्षित पानी देना स्थानीय प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है।”
— गणेश तर्वेकर, भाजपा गुट नेता
ज्ञापन सौंपते समय भाजपा गुट नेता गणेश तर्वेकर के साथ नगरसेवक अवेष पठान, सचिन आकुलवार, प्रो. अमीर धम्मानी, हेमंत नन्नावरे, श्रीमती प्रिया लांबट और श्रीमती शिल्पा शेंडे प्रमुख रूप से उपस्थित थे। नागभीड के आम नागरिकों को भी अब उम्मीद है कि प्रशासन इस पर तुरंत एक्शन लेगा और दूषित पानी की समस्या से राहत दिलाएगा।
