
विकास के दावों की खुली पोल: हर दिन हजारों लोग दांव पर लगा रहे अपनी जान
झालीया (पिपरटोला):
एक तरफ जहां सरकारें चमचमाती सड़कों और ग्रामीण विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राम पिपरटोला से चिचटोला को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग आज की तारीख में ‘मौत का कुआं’ बन चुका है। झालीया क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस मार्ग की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि यहाँ से गुजरने वाले हर शख्स को अपनी जान का डर सताता रहता है। हर दिन हजारों लोग इसी जानलेवा रास्ते से सफर करने को मजबूर हैं।
मासूम स्कूली बच्चे, मरीज और मजदूर… सब बेबस!
इस बदहाल सड़क का सबसे बुरा असर देश के भविष्य यानी स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। मासूम बच्चे हर दिन अपनी जान हथेली पर लेकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। सड़क पर बने गहरे गड्ढे और बिखरे पत्थर आए दिन हादसों को न्योता दे रहे हैं।
इसके अलावा:
- किसान और मजदूर: किसानों को अपनी फसल शहर ले जाने और मजदूरों को रोज की मजदूरी के लिए शहर जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
- मरीज और गर्भवती महिलाएं: आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। एम्बुलेंस का इस रास्ते पर आना भी दूभर हो जाता है।
जिप मेंबर छबु ताई यूके के 4 साल के ‘आश्वासन’ से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
ग्रामीणों का गुस्सा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ चरम पर है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि जिला परिषद (जी.प.) सदस्य छबु ताई यूके पिछले 4 सालों से सिर्फ और सिर्फ खोखले आश्वासन दे रही हैं।
“चार साल बीत गए, हर बार चुनाव और मुलाकातों में सड़क बनवाने का वादा किया जाता है, लेकिन धरातल पर काम शून्य है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?”
— आक्रोशित ग्रामीण
नेताओं की इस अनदेखी के कारण आज पिपरटोला से चिचटोला मार्ग पूरी तरह से जर्जर हो चुका है और लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
वार्डवासियों और क्षेत्र के युवाओं का कहना है कि अगर इस सड़क का निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू नहीं किया गया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए ग्रामीण अब उग्र आंदोलन और उच्चाधिकारियों का घेराव करने की रणनीति बना रहे हैं।
विशेष रिपोर्ट: सुनील गिरड़कर, न्यूज़ भारत।
