
बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले से एक बड़ी और दर्दनाक खबर सामने आ रही है। जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच बुधवार की शाम शहर के एक व्यस्त इलाके में बड़ा हादसा हो गया। पुरानी श्रीराम मंदिर गली में एक निर्माणाधीन भवन के पास स्थित जर्जर मकान की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे की चपेट में आने से बेसमेंट में काम कर रहे तीन मजदूर मलबे में पूरी तरह दब गए।
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों, पुलिस प्रशासन और अन्य मजदूरों ने तुरंत मोर्चा संभाला और कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को मलबे से बाहर निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया।
शाम के वक्त अचानक मलबे में तब्दील हुई दीवार
मिली जानकारी के अनुसार, पुरानी श्रीराम मंदिर गली में एक नए भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। इस निर्माणाधीन साइट से सटकर ही एक बेहद पुराना और जर्जर मकान स्थित है। बुधवार शाम करीब 5:30 बजे जब मजदूर बेसमेंट में काम में जुटे थे, तभी भारी बारिश के कारण जर्जर दीवार का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। मलबा सीधे बेसमेंट में जा गिरा, जिससे वहां काम कर रहे तीन मजदूर मलबे के नीचे दफन हो गए।
स्थानीय लोगों और पुलिस ने मसीहा बनकर बचाई जान
घटना के तुरंत बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय नागरिकों ने बिना वक्त गंवाए खुद ही राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। मलबे को हटाकर तीनों मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिससे एक बड़ा अनर्थ होने से बच गया।
घायलों की पहचान और एक मजदूर हायर सेंटर रेफर
इस हादसे में घायल हुए मजदूरों की पहचान हो गई है:
- निलेश नगपुरे (निवासी- नैतरा) – जिला अस्पताल में इलाज जारी
- चैतराम सौलखे (निवासी- नैतरा) – जिला अस्पताल में इलाज जारी
- मनिक तिलपेवाड़ा (निवासी- हट्टा) – हालत गंभीर, प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर
एंबुलेंस की लेती पर भड़के लोग: प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद एंबुलेंस काफी देर से पहुंची, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। स्थिति को भांपते हुए पुलिस और स्थानीय लोगों ने खुद एक गंभीर रूप से घायल मजदूर को सीढ़ियों के सहारे बाहर निकाला और निजी वाहन से तुरंत अस्पताल रवाना किया।
प्रशासनिक निगरानी पर खड़े हुए गंभीर सवाल
लगातार हो रही बारिश के बीच हुए इस हादसे ने शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था और नगर पालिका व प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बड़ा सवाल यह है कि: जब बगल में इतनी जर्जर दीवार थी, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए? क्या प्रशासन अब शहर के अन्य जर्जर भवनों को लेकर कोई सख्त कदम उठाएगा या किसी और बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा?
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