
बालाघाट। जिले की ग्राम पंचायत जाम (Jam) से भ्रष्टाचार और तानाशाही का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। ग्रामीणों द्वारा आला अधिकारियों को सौंपे गए एक शिकायती पत्र ने पंचायत में चल रहे कथित भ्रष्टाचार का पूरा ‘कच्चा चिट्ठा’ खोलकर रख दिया है। इस शिकायती पत्र में सरपंच और सचिव पर नियमों को ताक पर रखकर सरकारी धन का बंदरबांट करने के 4 बेहद गंभीर और बड़े आरोप लगाए गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि विकास के नाम पर कागजों पर तो लाखों रुपये बहा दिए गए, लेकिन धरातल पर सिर्फ और सिर्फ घोटाला नजर आ रहा है। आइए आपको बताते हैं इस कथित महाघोटाले की वो 4 बड़ी कड़ियां:
1. मनरेगा वृक्षारोपण घोटाला: राशि गायब, धरातल से पौधे ‘साफ’
शिकायत के मुताबिक, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्राम जामटोला, जाम क्रिकेट ग्राउंड और नामदेव शाकुरे के खेत के सामने बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का कार्य कराया गया था।
- कागजों पर खेल: पौधों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग तार लगाने और देख-रेख के नाम पर पंचायत मद और मनरेगा से भारी-भरकम राशि निकाल ली गई।
- हकीकत: धरातल पर आज की स्थिति में एक भी पौधा सुरक्षित नहीं है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बिना काम कराए ही लाखों की सरकारी राशि को डकार लिया गया।
2. ‘टाका तालाब’ में फिसर पॉट का खेल, मजदूरी भुगतान में धांधली
भ्रष्टाचार का दूसरा बड़ा खेल ‘टाका तालाब’ परिसर में खेला गया। यहाँ नियमों को दरकिनार कर एक ही परिसर के भीतर 4 से 5 ‘फिसर पॉट’ (Fisher Pot) का निर्माण कार्य करा दिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस निर्माण कार्य में स्थानीय मजदूरों को दरकिनार किया गया और फर्जी मस्टरोल व वाउचर के जरिए मजदूरी के भुगतान में भारी अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी की गई है।
3. 14वीं-15वीं वित्त राशि का बंदरबांट: बिना पंचों के प्रस्ताव के उड़ाए लाखों रुपये
“सरपंच और सचिव ने ग्राम पंचायत को अपनी निजी जागीर समझ लिया है। बिना पंचों की सहमति और बिना किसी वैध प्रस्ताव के नियमों को ताक पर रखकर मनमर्जी से सरकारी खजाने को खाली किया जा रहा है।”
शिकायती पत्र में वित्तीय वर्ष 2022-2023 से लेकर 2026-2027 तक के कार्यों पर बड़े सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि 14वीं और 15वीं वित्तीय वर्ष की राशि के तहत कराए गए कार्यों और उनके बिल-वाउचरों में भारी धांधली की बू आ रही है। बिना किसी पंच प्रस्ताव के, नियमों के विरुद्ध जाकर सरपंच और सचिव ने मिलीभगत कर अपनी मर्जी से लाखों रुपये की शासकीय राशि आहरित (withdraw) कर ली।
4. सबसे बड़ा सनसनीखेज मामला: बिना NOC के ढहा दिया सरकारी अस्पताल!
इस पूरे मामले में सबसे हैरान और हैरान करने वाली बात जाम के सरकारी अस्पताल की है। ग्रामीणों के अनुसार, जो सरकारी अस्पताल पहले से जीर्ण-शीर्ण (जर्जर) अवस्था में था, उसे सरपंच ने बिना किसी सक्षम स्वास्थ्य विभाग की NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के अपनी मनमर्जी से रातों-रात तुड़वा दिया। इतना ही नहीं, मलबे और अस्पताल की कीमती सरकारी सामग्री को भी खुर्द-बुर्द (अफरा-तफरी) कर ठिकाने लगा दिया गया, जिसका कोई हिसाब पंचायत रिकॉर्ड में नहीं है।
ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग, आंदोलन की चेतावनी
ग्राम पंचायत जाम में सामने आए इस चौतरफा भ्रष्टाचार को लेकर अब ग्रामीणों का आक्रोश सातवें आसमान पर है। आवेदकों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दोषी सरपंच, सचिव और संबंधितों के खिलाफ जल्द ही रिकवरी और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
