
सालेकसा: प्रशासन की बेरुखी और जनप्रतिनिधियों के खोखले वादों से तंग आकर आखिरकार पिपरटोला और चिचटोला के ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया है। पिपरटोला से चिचटोला नदी कुवाढाश नाले पर पुल निर्माण की 20 साल पुरानी मांग को लेकर आज से बेमियादी आमरण अनशन (बेमुद्दत आमरण उपोषण) दोबारा शुरू कर दिया गया है।
इस आंदोलन का नेतृत्व पिपरटोला के ग्राम पंचायत सदस्य सुनील गिरड़कर कर रहे हैं, जिनके साथ भारी संख्या में आक्रोशित ग्रामीण और बुजुर्ग भी अनशन स्थल पर डटे हुए हैं।
दो साल पहले भी हुआ था अनशन, मिले थे सिर्फ झूठे वादे
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह कोई नई मांग नहीं है। पिछले 20 सालों से ग्रामीण इस पुल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ठीक दो साल पहले भी ग्रामीणों ने अपनी जान दांव पर लगाकर आमरण अनशन किया था। उस दौरान क्षेत्र के मौजूदा विधायक और सांसद ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर लिखित और मौखिक आश्वासन दिए थे कि पुल का निर्माण जल्द शुरू कराया जाएगा। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर एक ईंट तक नहीं रखी गई।
“इस बार सिर्फ आश्वासन नहीं, काम चाहिए” – सुनील गिरड़कर
अनशन पर बैठे सुनील गिरड़कर और ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि नेताओं और प्रशासन ने पिछले दो साल से उन्हें सिर्फ अंधेरे में रखा है। इस बार ग्रामीण किसी भी तरह के खोखले आश्वासन के झांसे में नहीं आएंगे। जब तक पुल निर्माण का काम वास्तव में जमीन पर शुरू नहीं हो जाता, तब तक यह आमरण अनशन खत्म नहीं होगा।
पुल न होने के कारण बारिश के दिनों में यह पूरा इलाका टापू बन जाता है। स्कूली बच्चों, मरीजों और गर्भवती महिलाओं को जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अब यह लड़ाई आर-पार की है।
