नागपुर में महावितरण की बड़ी लापरवाही: 33 लाख का बजट, फिर भी दम तोड़ रहे 1,668 पौधे, पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश!

नागपुर: उपराजधानी नागपुर में पर्यावरण संरक्षण के दावों की धज्जियां उड़ाने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। महावितरण (Masedcl) और नागपुर नगर निगम (NMC) की आपसी लापरवाही और अनदेखी के कारण 1,668 पौधों का दम घुट रहा है। 61 बड़े पेड़ों को काटने के एवज में लगाए गए इन हजारों पौधों की सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिससे आधे से अधिक पौधे पहले ही दम तोड़ चुके हैं।

क्या है पूरा मामला?

साल 2015 में 132 केवी बेसा ईएचवी सबस्टेशन के अंतर्गत 33 केवी महालीनगर उपकेंद्र के काम के लिए नागपुर नगर निगम की अनुमति से 61 पेड़ काटे गए थे। निगम ने शर्त रखी थी कि इसके बदले महावितरण को शहर के विभिन्न हिस्सों में 1,668 नए पौधे लगाने होंगे और उनका रखरखाव करना होगा।

इस शर्त को पूरा करने के लिए सितंबर 2015 में महावितरण और ‘कहाले ट्रेडिंग कंपनी’ के बीच 38 महीनों के लिए 33 लाख रुपये का एक करार (कॉन्ट्रैक्ट) किया गया था। लेकिन लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी धरातल पर हकीकत बेहद खौफनाक और निराशाजनक है।

निरीक्षण में सामने आई चौंकाने वाली हकीकत

स्थानीय स्तर पर की गई जांच और निरीक्षण में बेहद हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं:

  • प्लास्टिक थैलियों के साथ रोपण: कई जगहों पर पौधों को उनकी सुरक्षात्मक प्लास्टिक थैलियों को हटाए बिना ही सीधे मिट्टी में दफना दिया गया, जिससे उनकी जड़ें फैल नहीं सकीं और वे सूख गए।
  • रखरखाव का पूर्ण अभाव: पौधों के लिए पानी, खाद और सुरक्षात्मक घेरे (ट्री गार्ड) की कोई व्यवस्था नहीं है।
  • आधे पौधे मृत: समय पर पानी और देखभाल न मिलने के कारण आधे से ज्यादा पौधे पहले ही पूरी तरह सूखकर नष्ट हो चुके हैं।

कहां कितने पौधे लगाए गए थे? (लोकेशन वार सूची)

क्र.वृक्षारोपण का स्थानलगाए गए पौधों की संख्या
1.पुलिस हेडक्वार्टर टेकानाका760
2.सेंट्रल जेल परिसर300
3.खापरी डिपो120
4.वाठोड़ा चार्जिंग स्टेशन120
5.मोर भवन बस स्टॉप103
6.धाबा एनआईटी परिसर90
7.उर्दू शाला सक्करदरा85
8.यशोधरा पुलिस स्टेशन65
9.अंबाझरी फॉरेस्ट25
कुल योग1,668

बिना NOC के लगा दिए पौधे; प्रशासन का गैर-जिम्मेदाराना रवैया

इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही की हद तो तब पार हो गई जब टेकानाका स्थित ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कार्यालय से बिना किसी लिखित अनुमति (NOC) के, केवल मौखिक सहमति पर 760 पौधे लगा दिए गए। वहीं, खापरी डिपो के मैनेजर अभिजीत नलावडे के अनुसार, विकास कार्यों की कोई जानकारी लिए बिना ही यहां पौधे लगा दिए गए, जिसके कारण अब कई पौधे निर्माण कार्य की कगार पर आ गए हैं।

अधिकारियों का क्या कहना है?

जब इस मामले पर महावितरण के कार्यकारी अभियंता जयंत खिरकर से बात की गई, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा:

“यह पहला मानसून है। सर्वे करके जितने भी पौधे मर चुके हैं, उन्हें ठेकेदार के माध्यम से रिप्लेस (बदला) किया जाएगा।”

दूसरी ओर, इस घोटाले में शामिल ‘कहाले ट्रेडिंग कंपनी’ से जब उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका फोन नॉट रीचेबल आया, जिससे कंपनी की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जनता के अनुत्तरित सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है:

  1. जब 33 लाख रुपये का भारी-भरकम कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था, तो पौधों की यह दुर्दशा क्यों हुई?
  2. बिना लिखित NOC के इतनी बड़ी संख्या में वृक्षारोपण कैसे कर दिया गया?
  3. सरकारी पैसों की इस खुली बर्बादी और पर्यावरण के साथ हुए खिलवाड़ के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कब कार्रवाई होगी?

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