नागपुर: सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले मुनाफाखोरों के खिलाफ नागपुर में एक बहुत बड़ी कार्रवाई हुई है। शहर के गणेशपेठ थाना क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध संदेश दवा बाजार से नकली दवाइयों के एक बड़े काले कारोबार का पर्दाफाश हुआ है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) यानी औषध प्रशासन की टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर छापेमारी कर इस जालसाजी को पकड़ा है, जहाँ आयुर्वेदिक दवाओं को धड़ल्ले से एलोपैथिक दवा बताकर मरीजों को बेचा जा रहा था। लैब की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
गुप्त सूचना पर FDA की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
यह पूरा मामला गणेशपेठ के संदेश दवा बाजार स्थित ‘मेसेज विनस फार्मास्यूटिकल’ नामक मेडिकल स्टोर का है। एफडीए (FDA) प्रशासन को लगातार इनपुट्स मिल रहे थे कि इस दुकान में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा चल रहा है।
सूचना को पुख्ता करते हुए औषध निरीक्षक (Drug Inspector) प्रशांत रामटेके और उनकी विशेष टीम ने दुकान पर औचक छापा मारा। इस कार्रवाई के दौरान टीम को दुकान से भारी मात्रा में संदिग्ध और बिना पुख्ता दस्तावेजों वाली दवाइयां बरामद हुईं, जिन्हें तुरंत सीज कर उनके सैंपल जांच के लिए सरकारी प्रयोगशाला (Lab) भेज दिए गए।
लैब रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, मिलीं प्रतिबंधित चीजें
जब लैब से इन संदिग्ध दवाओं की जांच रिपोर्ट सामने आई, तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए। रिपोर्ट में साफ हुआ कि इन तथाकथित दवाओं में कुछ बेहद खतरनाक, प्रतिबंधित और इंसानी शरीर में अस्थायी उत्तेजना बढ़ाने वाले तत्व (Ingredients) मिलाए गए थे। सबसे बड़ी बात यह कि इन प्रोडक्ट्स को पूरी तरह से ‘डुप्लीकेट’ और ‘फर्जी’ श्रेणी का पाया गया, जो किसी भी मरीज की जान जोखिम में डाल सकते थे।
इन आरोपियों पर दर्ज हुआ मुकदमा: लैब की चौंकाने वाली रिपोर्ट आते ही गणेशपेठ पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पुलिस ने फार्मेसी संचालक विनीत वरधने, मैसेज अल्टीमेट आयुर्वेदिक और मोहित अश्विन कुमार चड्ढा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कर लिया है।
क्या किसी बड़े ड्रग सिंडिकेट का है हाथ?
गणेशपेठ थाने के पुलिस निरीक्षक टीकाराम थाटकर के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह आशंका गहरा गई है कि नकली दवाइयों का यह रैकेट सिर्फ इस एक दुकान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार किसी बहुत बड़े अंतरराज्यीय गिरोह (Interstate Network) से जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस और एफडीए की संयुक्त टीमें अब इस बात का पता लगा रही हैं कि ये नकली दवाइयां कहाँ बनाई जा रही थीं (मैन्युफैक्चरिंग सोर्स क्या है) और शहर के किन-किन अन्य मेडिकल स्टोर्स या अस्पतालों में इसकी सप्लाई की गई है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस रैकेट के मुख्य सरगना को भी दबोच लिया जाएगा।
